Home चुनावी मुद्दा आखिर क्यों राजनीति में धर्म की होती है entry

आखिर क्यों राजनीति में धर्म की होती है entry

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Picture source: Third party.

दिल्ली: अरविंद केजरीवाल ने 2020 का दिल्ली विधानसभा चुनाव बिजली-पानी-शिक्षा-स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर लड़ा ये सभी जानते हैं। अरविंद केजरीवाल ने परिवर्तन एनजीओ औऱ अपनी सरकारी नौकरी के दौरान सामाजिक बुराइयों के लिए काम किये, ख़ासकर वह भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ काम करने लिए जाने जाते रहे, अन्ना आंदोलन के बाद वह राजनीति में आये, तब अरविंद केजरीवाल ने शायद ही कभी जय हनुमान कहा होगा, लेकिन हाल ही के चुनाव के दौरान और शपथ ग्रहण समारोह में रह-रहकर हिंदुत्व की झलक दिखी, खैर ये उनका निजी मत है।

लेकिन एक मुख्यमंत्री होने के नाते उन्हें जेएनयू हिंसा, जामिया हिंसा, शाहीन बाग़, गार्गी कॉलेज जैसे मामलों पर खुलकर बोलना चाहिए था, और अपना पक्ष सुनिश्चित करना चाहिए था, जो अरविंद केजरीवाल एलजी के घर के पास फाइल पास करवाने के लिए धरने पर बैठे थे वो ही अरविंद केजरीवाल छात्रों की सुरक्षा के लिए कितने दिन उनसे बातचीत करने गए?

Picture source: Third party.

जय हनुमान या कुछ भी कहना व्यक्तिगत फैसला है। लेकिन सार्वजनिक रूप से शपथ समारोह पर हिंदुत्व को उजागर करना बहुत ठीक नही, क्योंकि अरविंद केजरीवाल जिस दिल्ली को अपना कहते है वो दिल्ली उन्हें काम के लिए जानती है ना कि हनुमान की जय से, एक तरफ़ वो कहते थे कि धर्म की नही हम काम की राजनीति करते है तो फिर चुनाव के दौरान हनुमान जी की जय ज़ोर क्यों पकड़ने लगी? धर्म कभी भी राजनीती का हिस्सा नहीं बनना चाहिए, एसा खुद मंदिरों के पंडितों को मत है।

हम नेताओं को दोष देते है लेकिन नेता जनता की नब्ज जानते है, लोगो के अंदर धर्म जकड़ा हुआ है , यही कारण है की राजनीति में धर्म का प्रचार किया जाता रहा है। सोचने की बात है 2015 के चुनाव में क्या इतनी दफ़ा अरविंद केजरीवाल ने हनुमान जी का जाप किया था? जितना 2020 के चुनाव में किया?

क्या कोई ऐसा नेता होगा भविष्य में जो बिना धर्म का बखान करे ज़मीनी स्तर पर काम करे।

Written by – Sapna Yadav

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