Home कलम से क्या विकास दुबे का इन्काउन्टर फेक है?

क्या विकास दुबे का इन्काउन्टर फेक है?

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Picture courtesy: Third-party.

नई दिल्ली: खबरों के मुताबिक विकास दुबे लगभग 30 वर्ष अपने पेशे में था। विकास दुबे अपराध के पेशे में कैसे आया? यह वर्तमान समाज का महत्वपूर्ण विषय आज भी है। अपने तीस वर्षो के आपराधिक जीवन में वह लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा।

विकास दुबे ने अपने आकाओं के कहने पर आत्मसमर्पण किया होगा और हो सकता है कि यह एक बड़ी साजिश हो। हो सकता है कि सारे सबूतों को मिटाने के लिए इस इन्काउन्टर को अंजाम दिया होगा। यह तो शीशे की तरह स्पष्ट है कि जिस सत्ता को जनता वोट देकर चुनती है वह अपने मूल चरित्र में कितनी हिंसक और अपराधी है।

विकास दुबे कथित तौर पर कानपुर में एक मुठभेड़ में मारा गया है। गैंगस्टर के भागने की कोशिश में विकास दुबे और उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के बीच मुठभेड़ हो गई। विकास दुबे एक हिस्ट्रीशीटर, गैंगस्टर से राजनेता, भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश में कानपुर देहात जिले में स्थित है। उनके खिलाफ पहला आपराधिक मामला 1990 के दशक की शुरुआत में दर्ज किया गया था, और 2020 तक उनके नाम पर 60 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। रिपोर्टों के अनुसार, विकास दुबे ने भागने की कोशिश की, जिसके परिणामस्वरूप मुठभेड़ हुई। शुरुआती रिपोर्टों ने सुझाव दिया है कि विकास दुबे मारा गया है।

Picture courtesy: Third-party.

शव को घटनास्थल से लाला लाजपत राय अस्पताल या हैलट अस्पताल ले जाया गया था, जहां पुलिस और डॉक्टरों की टीम मौजूद थी। लेकिन कुछ बातें दर्शाती है कि यह सब पहले से तय था कि किस जगह यह इन्काउन्टर किया जाएगा। एसा इसलिए कहा जा रहा है कि क्योंकि मीडिया को कुछ दूर पर ही रोक दिया जाता है और फिर जब गाडी को पलटी तो उस गाडी पर कोई भी निशान नहीं था। और सारे शीशे भी सही सलामत हैं तो विकास भागा कैसे।

काफी लोग इस इन्काउन्टर का समर्थन कर रहे हैं लेकिन कोई इस बात को नहीं सोच रहा है कि कितने ही राज़ है जो विकास के साथ मर गए जो शायद उसके रहते बाहर आ सकते थे। कितने ही बडे पुलिस अधिकारी, कितने ही राजनेता कि कुर्सी खतरे में पड जाती।

यही राजनेता अपने फायदे के लिए किसी का भी इन्काउन्टर करवा सकते हैं कि और किसी को भी अपनी पार्टी में शामिल कर सकतें है। चाहे वो भू-माफिया हो या फिर किसी बम धमाके का अपराधी। और उससे उपर हमारी प्यारी जनता। वह लोग अपने वोट का सही महत्व कभी नहीं जान सकते। उनको इससे फर्क नहीं पडता कि कोन उनके वार्ड का उमीद्वार है, उन्हे सिर्फ बडी पार्टी और बडे चहरे से मतलब है। जब तक हम लोग अपने मत का सही मूल नहीं जानेंगे तब तक एसे विकास आंएगे और ऐसे ही उसका इन्काउन्टर होगा। जांच चल रही है और शायद सभी को पता है कि क्या निकलेगा जांच में।

Story By Sapna Yadav and Edited By Ritesh Kumar Singh

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