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राम मंदिर के भूमि पूजन से दो दिन पहले से ही धार्मिक गतिविधियां शुरू

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Picture courtesy: Third-party.

नई दिल्ली: अयोध्या में राम जन्मभूमि निर्माण के लिए भूमि पूजन से दो दिन पहले से ही धार्मिक गतिविधियां शुरू हो गई हैं। अयोध्या में हर जगह बैरीकेडिंग कर दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी से अपील की है कि अयोध्या में बुधवार को होने वाले भूमि-पूजन समारोह में सिर्फ वही लोग आएं, जिन्हें आमंत्रित किया गया है। योगी ने राम जन्मभूमि के पास घंटों रह कर समारोह की तैयारियों की समीक्षा की। उच्चतम न्यायालय के पिछले साल के फैसले के बाद यहां मंदिर निर्माण का काम शुरू होने वाला है। सोमवार को 12 पुजारियों ने भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की। उसके बाद भगवान राम और माता सीता के राजवंशों के देवी-देवताओं की पूजा की जाएगी। मंगलवार को अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर में भी पूजा की जाएगी।

ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि कोविड-19 से जुड़ी पाबंदियों के मद्देनजर सभी अयोध्या के बाहर ही ‘‘भजन-कीर्तन’ का आयोजन करें। भूमि पूजन में आमंत्रित अतिथियों में इकबाल अंसारी भी शामिल हैं। वह मंदिर-मस्जिद विवाद मामले में पक्षकार थे। 69 वर्षीय अंसारी ने पीटीआई से बातचीत करते हुए कहा कि, ‘‘मैं इसमें पक्का हिस्सा लूंगा। न्यायालय के फैसले के बाद अब विवाद खत्म हो गया है।”

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अंसारी के पिता हाशीम अंसारी इस मामले में सबसे पुराने पक्षकार थे, जिनकी 2016 में मृत्यु हो गई। उनके बाद बेटे ने इस मुकदमे को अदालत में जारी रखा। उनके परिवार के सदस्यों ने बताया कि अयोध्या के एक सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद शरीफ को भी कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया गया है लेकिन वह बड़ी उम्र और बीमारी के कारण इसमें शामिल नहीं हो सकते। कार्यक्रम के दौरान मंच पर सिर्फ पांच लोग होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, ट्रस्ट के प्रमुख महंत नृत्य गोपालदास महाराज, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।

वामपंथी दलों ने इस कार्यक्रम के आयोजन का विरोध करते हुए कहा है कि केन्द्र और राज्य सरकार के तत्वाधान में भूमि पूजन का आयोजन उच्चतम न्यायालय के आदेश के विरूद्ध है जिसने इसके लिए ट्रस्ट के गठन का आदेश दिया था। भाकपा और माकपा ने अलग-अलग बयान जारी कर कहा कि फैसला सुनाते हुए उच्चतम न्यायालय ने 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने की घटना की निंदा की थी। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भूमि पूजन के लिए घोषित पाँच अगस्त की तिथि को अशुभ मुहुर्त बताते हुए सोमवार को फिर से प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध किया कि वह इस कार्यक्रम को स्थगित कर दें और चतुर्मास खत्म होने के बाद ही इस कार्यक्रम को करवाएं।

योगी आदित्यनाथ ने इस आयोजन को ‘ऐतिहासिक’ बताया है। उन्होंने बताया, ‘‘यह ना सिर्फ ऐतिहासिक है बल्कि भावनात्मक पल भी है क्योंकि 500 साल के बाद राम मंदिर निर्माण कार्य शुरू हो रहा है। यह नये भारत की नींव होगा।”कार्यक्रम का दूरदर्शन पर साीधा प्रसारण होगा।

जिस नीव पर भाजपा सरकार अभी तक चुनाव लडती आई है वह अब पूरा होने वाला है। लेकिन जिन नेताओं ने इस लडाई कि शुरुआत की थी, आज वह इस मौके से नदाराद हो गए हैं। अटल जी अब नहीं रहे लेकिन अडवानी जी कि इस समय पार्टी में भूमिका कम होती दिख रही है। कम से कम उन्हे इस मौके पर वहाँ आमंत्रित किया जाना चाहिए।

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