Home कलम से टीआरपी के खेल में छुप रहा कोरोना का सही अपडेट

टीआरपी के खेल में छुप रहा कोरोना का सही अपडेट

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Picture courtesy: Third-party.

नई दिल्ली: सभी न्यूज़ चैनल की सबसे बडी मुख्य समाचार में एक चर्चा है कि दिल्ली को सुप्रिम कोर्ट ने टेस्टिंग को लेकर फटकार लगाई है। देश के बडे कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाई है इसमें कोई दो राय नहीं है। जब दिल्ली सरकार ने गलती कि है तो उसे इन सबका जवाब देना होगा।

लेकिन सवाल यह है कि दिल्ली में सच में कम टेस्ट हो रहे हैं। इसका जवाब आपको नीचे दिए गए कुछ तसवीरें से मिल जाएगा।

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West Bengal
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Gujrat
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Delhi
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Uttar Pradesh
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Maharashtra

ये सारे Screenshot https://covidindia.org/ इस वेबसाइट से लिए गए हैं। आप इन सभी तसवीरों में साफ साफ देख सकते हैं कि दिल्ली में सबसे ज्यादा टेस्ट हो रहे हैं। यहाँ तक महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात से ज्यादा। इन सभी Screenshot में से आप देखोगे कि उत्तर प्रदेश में सबसे कम टेस्टिंग कम हो रही है। ऐसी उमीद जताई जा रही है कि जब वहाँ पर टेस्ट की रफतार बढेगी तो नए कोरोना के केस भी सामने आने कि उमीद है। हाल ही में एक रिटायर्ड आईएएस अफसर के खिलाफ यूपी सरकार ने एक FIR किया है। सूर्य प्रताप सिंह ने Tweet कर कहा था कि “CM योगी की Team-11 की मीटिंग के बाद क्या मुख्य सचिव ने ज्यादा Corona Tests कराने वाले कुछ DMs को हड़काया कि “क्यों इतनी तेजी पकड़े हो, क्या इनाम पाना है, जो टेस्ट-टेस्‍ट चिल्ला रहे हो?”

पुलिस की FIR में कहा गया है कि ट्वीट में गलत तथ्य और गलत जानकारी हैं और इससे बड़े पैमाने पर लोगों में डर पैदा हो रहा है। सिंह के खिलाफ IPC की धारा 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत आदेश देने के लिए अवज्ञा), धारा 505-1 ((उकसाने का इरादा)), और महामारी नियंत्रण नियमों के अन्य वर्गों के तहत दर्ज किया गया है। सूर्यप्रताप सिंह 1982 बैच के IAS अधिकारी हैं जो 2015 में सेवानिवृत्त हुए है। उनकी अंतिम पोस्टिंग यूपी सरकार के प्रधान सचिव के रूप में थी लेकिन इस सेवानिवृत्त अधिकारी को नौकरी के दौरान भी उनके मुखर स्वभाव के लिए अधिक जाना जाता था।

उपर दिए गए तथ्य इस बात को सपष्ट कर रहे हैं कि यूपी मे कोरोना के मामले को कम दिखाने कि लिए कम टेस्ट किए जा रहे हैं। लेकिन हमारी फ्रीडम वाली उन्ही राज्यों में तकलीफ क्यों दिख रही है जहाँ पर भाजपा कि सरकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के सिविल अस्पताल को भी फटकार लगाई थी लेकिन किसी भी मीडिया में इसके उपर कोई बडी चर्चा नहीं दिखी। ना ही AIIMS में चल रही हडताल के बारे में किसी भी मीडिया में नहीं देखने को मिली, हाँ एक्का-दुक्का मीडिया में इन न्यूज को देखने को मिला।

आखिर क्यो हा रही है WHO के नियमों कि अनदेखी

आज के समय में सभी को मास्क लगाना अनवार्य कर दिया गया है जिसका मतलब है कि आप जहाँ जाओगे वहाँ आपको मास्क पहनना ज़रूरी है। लेकिन आप जब अपने घर के आस पास देखोगे तो आपको खुद दिख जाएंगे कि लोग मास्क सिर्फ दिखावे के लिए पहनते हैं। सरकारी गाईडलाइंस के मुताबिक आपको मास्क से मुंह और नाक को ढकना है लेकिन लग-भग सभी की नाक बाहर दिखती है। उनका इस बात को डर नहीं होता कि कोरोना उनके नाक के ज़रिए शरीर में प्रवेश कर सकता है।

आपने कई मीडिया कर्मियों देखा होगा कि उन्होने सही से मास्क नहीं लगाया होता जिससे दूसरों को भी कोरोना होने का खतरा बढ जाता है। लोग टीवी पर आने के लिए अपना मास्क उतार देते हैं (आम जनता और नेता दोनों) जैसे टीवी पर आने से कोरोना नहीं होता।

सभी को इस समय समझना होगा कि सरकार आपके लिए नहीं सिर्फ सरकार बनाने कि सोच रही है चाहे वह बिहार हो या फिर राजस्थान। आपकी सेहत आपके हाथ में है मास्क पहनो, सामाजिक दूरी का ख्याल करो और Immune system को तंदुरुस्त रखो।

Story By Ritesh Kumar Singh

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