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श्री राम की पोशाक के रंग को लेकर उठा विवाद, ट्रस्‍ट की तरफ से आई सफाई

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Picture courtesy: Third-party.

नई दिल्ली: राम मंदिर के शिलान्‍यास कार्यक्रम के पहले रोजना नए-नए विवाद सामने आ रहे हैं। इस बार विवाद भगवान राम के हरे रंग की पोशाक को लेकर है। दरअसल, बुधवार को होने वाले भूमि भूजन कार्यक्रम के दौरान भगवान राम को विशेष रूप से तैयार की गई हरे रंग की पोशाक पहनाई जाएगी। यह बात सार्वजनिक होते ही कई लोग इस पोशाक को धर्म और संप्रदाय से जोड़ने लगे। यह विवाद इतना गहरा गया कि आज राम जन्‍म भूमि तीर्थ ट्रस्‍ट के महासचिव चंपत राय को सामने आकर सफाई देनी पड़ी।

राम जन्‍म भूमि तीर्थ ट्रस्‍ट के महासचिव चंपत राय ने कहा है कि कुछ लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर इतना परेशान हैं कि वे उन्‍हें अपने सपनों में भी देखते हैं और उस पर नींद खो देते हैं। इसी तरह के लोग, भगवान राम के हरे कपड़ों को पीएम मोदी से जोड़ रहे हैं। उन्‍होंने यह भी बताया कि भगवान राम की पोशाक के निर्धारण का काम प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्‍यमंत्री कार्यालय या ट्रस्‍ट का नहीं है। पुजारी दिन के अनुसार भगवान राम के कपड़े का रंग तय करते हैं। यह एक निश्चित प्रक्रिया है। किसी के दबाव में आकर वह वह किसी प्रकार का बदलाव नहीं करता है।

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट महासचिव चंपत राय ने बताया कि हमने राम जन्मभूमि शिलान्यास आयोजन में भारत के लगभग 36 आध्यात्मिक परंपराओं के 135 संतों को निमंत्रण भेजा है। महात्मा संतों को मिलाकर लगभग पौने दो सौ लोगों को निमंत्रण भेजा गया है। उन्‍होंने बताया कि हमने इकबाल अंसारी और फैजाबाद निवासी पद्म मोहम्मद शरीफ को भी निमंत्रण भेजा है। महासचिव चंपत राय के अनुसार, मोहम्‍मद शरीफ लावारिस शवों का उनके धर्मानुसार अंतिम संस्कार करते हैं।

Picture courtesy: Third-party.

अगर आप भी समझते हैं की भारत आजाद हो चुका है तो शायद आप गलत हैं, आज भी लोग रंग को किसी एक धर्म से जोड़ते है। हर रंग मुस्लिम धर्म का, भगवा हिन्दू का, और सफेद ईसाई का। मतलब आजादी का सालों गुजर गए लेकिन आज भी लोग रंगों से लड़ना नहीं छोड़ पाए है।

और राम मंदिर एक इतिहासिक फैसला है, लेकिन इतना भी क्या इतिहासिक की मीडिया बाकी चीजों को देखे ही ना। भारत मे राम मंदिर बनने से चोरी, महिलाओं से दुष्कर्म खत्म तो नहीं हुआ है। मीडिया का काम है सच तो आम जनता तक पहुंचाना, लेकिन मीडिया सिर्फ TRP बटोरने मे लगा हुआ है, और हम लोग भी बड़े चाव से उन खबरों को देखते हैं।

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