Home कलम से टीआरपी के चक्कर में पत्रकारिता का गिरता स्तर

टीआरपी के चक्कर में पत्रकारिता का गिरता स्तर

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Picture courtesy: Third-party.

नई दिल्ली: पत्रकार को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। वैसे जब भी पत्रकार शब्द सुनते हैं तो लोगों को भरोसा होता है कि उन्हे सच दिखेगा या सुनाया जाएगा। ज़ाहिर है कि लोगों के मन में पत्रकार को लेकर एक इज्जत होती थी जो अब कहीं ना कहीं खोती जा रही है।

जहाँ कोई भी पत्रकार जो भी बोलते हैं या लिखते हैं लोग उसे साक्ष्य के रूप में हर जगह पेश किया जाता हैं क्योंकि लोग मानते हैं कि न्युज़ चैनल ने गहन रिसर्च करके उस खबर को दिखाया या छापा गया था।

अब सवाल ये पैदा हुआ कि इन्हें इनकी जिम्मेदारियों का अहसास कौन करवाएगा। आज बहुत कम पत्रकार ऐसे होंगे जो वास्तव में जन-कल्याण को ध्यान में रख कर पत्रकारिता कर रहे हैं। कहा जाता है कि आज का श्रोता वर्ग बहुत समझदार है परन्तु यह कथन कितना सच है लेख पढ़ने के बाद आप स्वयं निर्णय ले पाएंगे।

आज यदि हम कोई भी बड़ा समाचार चैनल देखते हैं तो वह मात्र सनसनीखेज खबरें ब्रेकिंग न्यूज के रूप में 24 घंटे दिखाया जा रहा है और दर्शक वर्ग भी बिना पलक झपकाए, बिना किसी शिकायत उन खबरों को देखे जा रहा है। खबरें भी ऐसी जिनमें न्यूज फैक्टर ना के बराबर होता है या फिर उनका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं होता। अभी कुछ समय पहले बालीवुड के स्टार सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या कि खबरे चैनल वालों ने दर्शकों के सामने खूब मसाला मार कर दिखाया। उनकी हेडलाइंस को देखकर बिलकुल नहीं लग रहा था कि उन्हे लोगों को खबर देनी है, उनको तो बस टीआरपी बटोरनी थी। अचंभे कि बात यह है कि इस समाचार की सब्जी खूब बढिया तरीके से परोसी गई और लोगों ने भी इसे चटकारे ले कर खाया। उदाहरण तो काफी दिए जा सकते है।

Picture courtesy: Third-party.

आरुषि मर्डर केस की बात की जाए तो मीडिया ने इस केस को नया मोड़ देने के लिए डा0 राजेश तलवार को पहले से हत्यारा साबित कर दिया। उन्होने कोर्ट के फैसले से पहले ही किसी को खूनी घोषित कर दिया।

भारतीय दर्शक और पाठक तो मात्र गीली मिटटी की तरह होते है, मीडिया रुपी कारीगर उसे जो रुप देना चाहे दे देता है।

डिबेट के नाम पर परोसी जा रही है नफरत

अगर आपको अच्छी ज़िंदगी जीनी है तो आप लोग कोई भी डिबेट शो ना देखें। वहाँ पर सिर्फ चिल्लाना और गाली गलोच दिखाइ जाती है। जो भी उन न्यूज़ चैनल को देखता हो आप उनसे किसी भी विषय पर चर्चा कर लो, वो बिना चिलाए आपको किसी भी सवाल जवाब नहीं दे सकते। क्योंकि अन्होने कभी बिना चिलाए कोई ङी डिबेट नहीं देखा होता।

कुछ पत्रकार बिना तेज़ आवाज़ के कोई भी सवाल या जवाब नहीं कर सकते। आपको यह सब देखने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पडेगी, बस प्राइम टाइम पर किसी ना किसी न्यूज चैनल पर देख सकते हैं।

कभी कभी मीडिया अपने मूल सिद्धांत को भूलकर पक्षपात कर खबरों को दिखाया जाता है। आज कर खबरें सिर्फ किसी एक पार्टी को दिखाने के फायदा दिलवाने के लिए खबरों को दिखाया जाता है। कभी-कभी तो किसी खास मकसद के लिए लोगों के मन से भटकाया जाता है।

अगर आप लोग समझदार है तो एसे न्यूज चैनल को देखना बंद कर दीजिए। और अपने बच्चों को इनसे दूर रखें। हो सके तो अखबार पढना शुरु कर दें और WhatsApp न्यूज से भी दूर रहें।

Story By Ritesh Kumar Singh

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