Home चुनावी मुद्दा आखिर क्यों चुनाव को लोकतंत्र का त्योहार कहा जाता है?

आखिर क्यों चुनाव को लोकतंत्र का त्योहार कहा जाता है?

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Picture source: Third party.

मतदान लोकतंत्र की ताकत है, और चुनाव लोकतंत्र का महापर्व होता है। वोट के अधिकार को पाकर सभी लोग मतदाता कहलाते हैं। वही मतदाता जिसके पास यह ताकत है कि वो सरकार बना भी सकता है और सरकार गिरा सकता है, और तो और स्वयं सरकार बन भी सकता हैं।

Picture source: Third party.

हमारे देश में वोट देने के दिन लोगों को जरूरी काम याद आने लग जाते हैं। अजागरूक, उदासीन व आलसी मतदाताओं के भरोसे हमारे देश के चुनावों में कैसे सबकी भागीदारी सुनिश्चित हो सकेंगी? साथ ही एक तबका ऐसा भी है जो प्रत्याक्षी के गुण न देखकर धर्म, मजहब व जाति देखकर अपने वोट का प्रयोग करता हैं। मतदान के दिन लोग अपना वोट  स्वार्थ के चक्कर में बेच देते हैं। यही सब कारण है कि हमारे देश के चुनावों में से चुनकर आने वाले अधिकत्तर नेता दागी होते है या फिर  जो नैतिक मूल्यों को महत्व नहीं जानते हैं। यह हमारे लोकतंत्र की कमी है।

सही और योग्य लोग जो व्यवस्था परिवर्तन करने का जज़्बा रखते है और चुनाव लडते है। वह दुर्भाग्यपूर्ण जीत नहीं पाते। हमें अच्छी व्यवस्था के संचालन के लिए अच्छे शासक का चयन सोच विचार कर करना चाहिए,  हर नागरिक को अपने वोट का महत्व समझकर लोकतंत्र के महापर्व में मतदान करके अपनी ज़िम्मेदारी निभानी चाहिए।

अगर आपने अपना वोट, नोट बो किसी भी लोभ में आकर खराब कर दिया, तो इसका सीधा असर आपके घर में पड सकता है।

हम आशा करते हैं कि आप सभी अपना वोट का महत्व समझ कर सही जगह वोट करंगे।

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