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बैक्टीरियल संक्रमण क्या है?

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Picture courtesy: Third-party.

बैक्टीरियल संक्रमण मानव शरीर के विभिन्न अंगों को भी प्रभावित करते हैं। कुछ हानिकारक बैक्टीरिया मानव शरीर को बीमार करने का कारक होते हैं। मानव शरीर जब किसी ऐसे बैक्टीरिया के संपर्क में आता है जो शरीर के लिए हानिकारक है तो उस स्थिति में मनुष्य बीमार हो जाता है और ऐसी स्थिति से बचने के लिए सतर्कता आवश्यक है। आमतौर पर बैक्टीरिया गला, फेफड़े, आंत इत्यादि जैसे अन्य अंगों में निवास करते हैं और यहीं पर अधिक संक्रमित होते हैं। बैक्टीरियल इन्फेक्शन का इलाज एंटीबायोटिक के द्वारा किया जाता है जो कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हुए बैक्टीरिया से लड़ने की शक्ति शरीर को प्रदान करती है।

संक्रमण के आधार पर बैक्टीरियल संक्रमण कई प्रकार के होते हैं, जिसमें मुख्य तौर पर त्वचा भोजन और यौन संबंध से संबंधित संक्रमण होते हैं।

संक्रमण के आधार पर बैक्टीरियल संक्रमण के प्रकार

  1. त्वचा संबंधी बैक्टीरियल संक्रमण

त्वचा संबंधी बैक्टीरियल संक्रमण अनेक कारणों से हो सकते हैं। जैसे शरीर की साफ-सफाई अच्छे से न करने की वजह से, दूषित व गीले वस्त्रों के कारण व किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से। इनमें से प्रमुख संक्रमण होते हैं सेल्यूलाइटिस, फोलिकुलितिस, इंपटिगो। इन विभिन्न संक्रमण के आधार पर इन पर अलग-अलग एंटीबायोटिक का असर होता है जिससे इनका इलाज किया जाता है।

  1. भोजन संबंधी बैक्टीरियल संक्रमण

दूषित भोजन, बांसी  और गंदे बर्तनों भोजन की वजह से भी भोजन संबंधित बैक्टीरियल संक्रमण होने का खतरा रहता है। भोजन संबंधी बैक्टीरियल संक्रमण की वजह से  दस्त, मितली, उल्टी, ठंड लगना, पेट दर्द व फूड प्वाइजनिंग इत्यादि समस्याएं हो सकती हैं। कई बार कच्ची मछली, मीट व अंडों से भी बैक्टीरियल संक्रमण होने की संभावनाएं रहती हैं।

  1. यौन संबंधी बैक्टीरियल संक्रमण

आजकल यौन संबंधी बैक्टीरियल संक्रमण में भी अधिक इजाफा देखने को मिलता है। इन संक्रमण के विषय में कई बार समय रहते पता नहीं चल पाता है। इसका एक कारण इन गुप्तांगों की अच्छे से साफ सफाई न करना, स्वच्छता ना रखना व यौन संबंधों में सुरक्षा का अभाव होता है। इससे भविष्य में कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है: जैसे प्रजनन क्षमता की समस्या, गुप्तांगों पर इंफेक्शन व सूजन इत्यादि ।

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बैक्टीरियल संक्रमण के लक्षण:

बैक्टीरियल संक्रमण के क्या क्या लक्षण हो सकते हैं?

संक्रमण के विभिन्न लक्षण हो सकते हैं, जैसे संक्रमित जगह की लाली, जलन, सूजन और संक्रमित हिस्से में गर्माहट का एहसास।

इसके कई अन्य लक्षण भी होते हैं:

  1. बुखार: इस प्रकार के संक्रमण संक्रमण में बुखार का होना बहुत ही आम बात है। जिसमें सर्दी लगना, दांत किटकिटाना, जी मिचलाना, कपकपी का आना हो सकता है।
  2. लिंफ नोड्स की सूजन: लिंफ नोड्स की सूजन हो सकती है। यह सूजन संक्रमित हिस्से के आस-पास की जगह पर होती है।
  3. गला खराब: गले में खिच खिच, आवाज का खराब होना, खराश, बोलने में तकलीफ इत्यादि समस्याएं गले के संक्रमित होने की वजह से होती है। ऐसे में नमक के गुनगुने ने पानी से गरारा करने से, गुनगुना पानी पीने से लाभ होता है।
  4. निमोनिया: निमोनिया भी बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण होता है इसमें सूखी व बलगम वाली खांसी, सांस फूलना, ठंड लगना सांस लेने में कठिनाई, पसीना आना, शरीर में पानी की कमी होना, मुंह सूखना, भूख न लगना, इत्यादि लक्षण होते हैं।
  5. खाद्य विषायन (Food Poissining): इसमें उल्टी, दस्त जीमर चलाना भूख न लगना पेट में दर्द इत्यादि समस्याएं होती हैं। ऐसे लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
  6. मूत्र संक्रमण(Urine infection): मूत्र संक्रमण जब होता है तो पेशाब में जलन, दर्द, बार-बार पेशाब आना, पेशाब करने की तात्कालिक आवश्यकता, इत्यादि समस्या होती है।

बैक्टीरियल संक्रमण के कारण:

बैक्टीरियल संक्रमण किन वजहों से होता है-

संक्रमण पैदा करने वाले कारकों के आधार पर बैक्टीरियल संक्रमण को 4 वर्गों में विभाजित किया गया है।

यह चार मुख्य समूह निम्नलिखित हैं:

1.वेसिली(Bacilli): इस संक्रमण की लंबाई 0.03 मिमी होती है यह संक्रमण एक लंबे फीते के आकार का होता है इस संक्रमण की वजह से टाइफाइड, सिस्टिसिस इत्यादि बीमारियां होती हैं।

  1. कोची (Cocci): यह संक्रमण 0.001 मिमी व्यास के गेंद के आकार का होता है यह जोड़े में, लंबी लाइनों में, गुच्छों में, इत्यादि रूपों में अपने आकार को बदलता रहता है।
  2. स्पाईरोकीट्स(Spirochaetes): यह संक्रमण छोटे चक्रों के आकार में होता है इस संक्रमण से कई बीमारियां हो सकती हैं यौन संक्रमण उपदंश फिफ्लीस इत्यादि।
  3. विब्रियो (Vibro): यह संक्रमण अल्पविराम के जैसा दिखता है। इस संक्रमण की वजह से हैजा (कॉलरा, विसूचिका) गंभीर, दस्त, निर्जलीकरण इत्यादि घातक बीमारियां होने का खतरा रहता है।

संक्रमण फैलने के सामान्य कारक:

० खांसी और छींकने से संक्रमण फैलने का खतरा रहता है।

०संक्रमित के संपर्क में आने से, स्पर्श करने, चूमने व यौन संबंध स्थापित करने से संक्रमण फैलने का खतरा रहता है।

०दूषित भोजन, जल, स्थान के संपर्क में व ग्रहण करने से संक्रमण फैलता है।

०संक्रमित प्राणियों के संपर्क में आने से, पालतू जानवर, पशु, कीट(मच्छर) इत्यादि की वजह से।

बैक्टीरियल संक्रमण से बचाव के उपाय:

  • बार- बार अच्छे से हाथ धोना
  • बैक्टीरिया रोधी साबुन, गर्म पानी का उपयोग करना
  • नियमित व्यायाम करना और इम्यून सिस्टम को मजबूत रखना
  • अपने घरों में आमतौर पर अधिक उपयोग में लाए जाने वाली वस्तुओं को नियमित रूप से साफ करना
  • बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने से बचना उचित दूरी का ध्यान रखना

भोजन संबंधी बैक्टीरियल इन्फेक्शन के उपाय:

  • भोजन बनाने में स्वच्छता का खास ध्यान रखना
  • भोजन बनाने से पूर्व हाथों को साबुन से अच्छे से साफ करना
  • खराब व दूषित भोजन खाने से परहेज़ करना
  • एक दूसरे का झूठा खाने से भी परहेज़ करना

शारीरिक बैक्टीरियल संक्रमण की रोकथाम के उपाय:

  • वेजिनाइटिस संक्रमण की रोकथाम के जोखिम को कम करने के उपाय करें, गुप्तांग पर साफ सफाई रखें, साबुन, क्रीम, लोशन, बैक्टीरिया, एमिनेम तत्वों की वजह से सूजन हो सकती है इससे बचाव का ध्यान रखें।
  • गले में दर्द होने की शिकायत पर नमक के गुनगुने पानी से गरारे करें, पानी में डिस्प्रिन डालकर भी करारा किया जा सकता है, गुनगुना पानी पिए इत्यादि।
  • निमोनिया निमोनिया से रोकथाम के उपाय उपयोग में लाएं।
  • कान में संक्रमण होने की स्थिति में स्वयं उपचार करने से बचें और शीघ्र डॉक्टर से संपर्क करें।
  • रक्त संबंधी इन्फेक्शन की स्थिति में डॉक्टर के परामर्श बिना किसी भी उपचार को न करें।

बैक्टीरियल संक्रमण का परीक्षण:

बैक्टीरियल संक्रमण का निदान कैसे होता है:

बैक्टीरियल संक्रमण के निदान के लिए सर्वप्रथम चिकित्सक से परामर्श करना अति आवश्यक है। चिकित्सक संक्रमण की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त दवाओं से मरीज का इलाज करते हैं।

चिकित्सक परीक्षण करेंगे जिसमें मरीज से प्राप्त नमूनों के आधार पर संक्रमण की पहचान कर उसका इलाज करते हैं।

बैक्टीरियल संक्रमण का इलाज:

बैक्टीरियल संक्रमण के आधार पर संक्रमण को जिन वर्गों में विभाजित किया गया है उस आधार पर बैक्टीरिया की पहचान करते हैं और उपचार आरंभ करते हैं।

जिसमें मरीज के रक्त, मूत्र, गला, (बलगम) इत्यादि से नमूने एकत्र करते हैं। नमूने के आधार पर लैब में जांच होती है। जांच के बाद इलाज की प्रक्रिया शुरू होती है। बैक्टीरिया के इलाज के लिए बाजार में दवाएं उपलब्ध हैं परंतु इन दवाओं का सेवन चिकित्सक के परामर्श अनुसार ही करना चाहिए।चिकित्सक के परामर्श अनुसार दवाओं का सेवन न करने की सूरत में इन दवाओं के हानिकारक परिणाम भी हो सकते हैं।

 

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