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क्या कुछ खास है इस विश्व पर्यावरण दिवस पर?

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Picture courtesy: Third-party.

हम सब इस बार विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को कोरोना महामारी के वैश्विक संकट के बीच मनाने जा रहे हैं। इस बार विश्व पर्यावरण दिवस की थीम बायोडायवर्सिटी, यानि कि जैवविविधता है। इसका मतलब है कि जीवो की वह प्रजातियां जिनका अस्तित्व पृथ्वी पर संकट में है, को बचाने की दिशा में हम प्रयास करेंगे। लेकिन यह महज संयोग है की कोरोना की वैश्विक महामारी के चलते खुद मानव प्रजाति के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है।

सन्न 1972 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा मानव पर्यावरण विषय पर संयुक्त राष्ट्र महासभा का आयोजन किया गया था। इसी चर्चा के दौरान विश्व पर्यावरण दिवस का सुझाव भी दिया गया और इसके दो साल बाद, 5 जून 1974 से इसे मनाना भी शुरू कर दिया गया। 1987 में इसके केंद्र को बदलते रहने का सुझाव सामने आया और उसके बाद से ही इसके आयोजन के लिए अलग अलग देशों को चुना जाता है।

तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने ‘पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति एवं उसका विश्व के भविष्य पर प्रभाव’ विषय पर व्याख्यान दिया था। पर्यावरण-सुरक्षा की दिशा में यह भारत का पहला कदम था ।

Picture courtesy: Third-party.

इसमें हर साल 143 से अधिक देश हिस्सा लेते हैं और इसमें कई सरकारी, सामाजिक और व्यावसायिक लोग पर्यावरण की सुरक्षा, समस्या आदि विषय पर बात करते हैं।

दुनिया में सबसे ज्यादा कार्बन उत्सर्जन करने वाले देश कुछ इस तरह है।

पहला नंबर इसमें चीन का आता है दूसरा नंबर संयुक्त राष्ट्र अमेरिका का आता है तीसरा नंबर यूरोपियन देशों का आता है और चौथे नंबर पर भारत है लेकिन अगर प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन देखा जाए तो अमेरिका पहले नंबर पर आता है और भारत दुनिया में दसवें नंबर पर आता है।

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भारत ने 2 अक्टूबर 2016 को पेरिस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए, इसके तहत भारत ने अपने सकल घरेलू उत्पाद में कार्बन उत्सर्जन के 2005 के स्तर की तुलना में 2030 तक 33 से 35% तक की कम करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा भारत ने 2030 तक अतिरिक्त वन्यारोपन और वातावरण के माध्यम से 2.5 से लेकर 3 मिलियन तक  कार्बन डाइऑक्साइड के समान अतिरिक्त कार्बन  कम करना भी शामिल है।

पर्यावरण को सुधारने हेतु यह दिवस महत्वपूर्ण है जिसमें पूरा विश्व रास्ते में खड़ी चुनौतियों को हल करने का रास्ता निकालता हैं। लोगों में पर्यावरण जागरूकता को जगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित विश्व पर्यावरण दिवस दुनिया का सबसे बड़ा वार्षिक आयोजन है। इसका मुख्य उद्देश्य हमारी प्रकृति की रक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाना और दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे विभिन्न पर्यावरणीय मुद्दों को देखना।

हर साल नदियों के सफ़ाई , वायु , जल प्रदूषण की रोकथाम  के लिए हजारो करोड़ का एक भारी भरकम बजट , जिसका एक बड़ा हिस्सा सफेदपोशों की जेबो को भारी करता दिखता है ।

भारत में पर्यावरण के संरक्षण के लिए एक मंत्रालय की स्थापना की गई है जिससे पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के नाम से जाना जाता है। सन 2020 – 21 के बजट में भारत सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए 3100 करोड़  का बजट आवंटित किया गया है।

जो प्राकृतिक समस्याएं मानवजनित है , उसकी सफाई के लिए अब प्रकृति ख़ुद झाड़ू चलाकर इस कोरोनाकाल में सफ़ाई कर रही है ।

हमें इस बात को ख़ास ध्यान में रख लेना चाहिए कि अगर हम प्रकृति के मामलों में लापरवाही बरतेंगे तो फिर प्रकृति भी हमारे मामले में फॉरमैलिटी ही करेगी जिसका परिणाम भयंकर होगा।

Story By Sapna Yadav

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