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महिलाओं, किसानों और युवाओं की आय बढ़ाने पर फोकस, विकास योजनाओं की जिलाधिकारी ने की समीक्षा

अनुपयोगी भवन बनेंगे रोजगार और आजीविका के नए केंद्र, बचेगा समय और धन

पौड़ी। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने बुधवार को विकास भवन सभागार में आयोजित समस्त खंड विकास अधिकारियों की मासिक समीक्षा बैठक में ग्रामीण विकास, वीबी जी राम जी, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम), उद्यान, पशुपालन तथा आंगनबाड़ी योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने, ग्रामीण आजीविका के अवसर बढ़ाने तथा स्वरोजगार आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए समन्वित एवं परिणामोन्मुखी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि विभिन्न विभागों के कई भवन वर्तमान में अनुपयोगी पड़े हैं। ऐसे भवनों की पहचान के लिए उपजिलाधिकारियों के माध्यम से सर्वेक्षण कर सूची तैयार कर ली गई है। उन्होंने निर्देश दिए कि इन भवनों का उपयोग आवश्यकता के अनुसार कोल्ड स्टोरेज, संग्रहण केंद्र, ग्रोथ सेंटर, प्रशिक्षण केंद्र, विपणन केंद्र एवं अन्य आजीविका आधारित गतिविधियों के लिए किया जाए। उन्होंने कहा कि निष्क्रिय ग्रोथ सेंटरों की समीक्षा कर उन्हें उपयुक्त स्थानों पर संचालित किया जाए तथा स्थानीय उत्पादों के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन से जोड़ा जाए। इससे ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग से समय और धन दोनों की बचत होगी।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को केवल उत्पादन गतिविधियों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनके उत्पादों के ब्रांडिंग, पैकेजिंग एवं विपणन पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने डेयरी, मशरूम उत्पादन, सब्जी उत्पादन, फल संरक्षण, मसाला निर्माण, सुगंधित पौधों तथा पुष्प उत्पादन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देकर ग्रामीणों की आय बढ़ाने के निर्देश दिए।

उन्होंने खंड विकास अधिकारियों को ग्राम संगठनों का नियमित निरीक्षण करने तथा उनकी गतिविधियों की सतत निगरानी सुनिश्चित करने को कहा। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादन एवं डेयरी गतिविधियां प्रभावी रूप से संचालित हो रही हैं, वहां डेयरी क्लस्टर विकसित किए जाएं तथा पशुओं के लिए गुणवत्तापूर्ण चारा उपलब्ध कराने हेतु उपयुक्त भूमि का चिन्हीकरण कर चारा विकास कार्यक्रम संचालित किए जाएं। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र में सामूहिक प्रयासों से ग्रामीण परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।

बैठक में बीडीओ पौड़ी एवं खिर्सू को स्थानीय स्तर पर सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने, किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने तथा उत्पादित सब्जियों की आपूर्ति पौड़ी, श्रीनगर एवं अन्य बाजारों तक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। वहीं बीरोंखाल विकासखंड में जिन क्षेत्रों में अभी तक स्वयं सहायता समूह गठित नहीं हुए हैं, वहां 15 दिनों के भीतर समूह गठन, मैपिंग एवं पोर्टल अपडेट की कार्रवाई पूर्ण करने को कहा गया।

लखपति दीदी योजना एवं आजीविका पैकेज की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकाधिक महिलाओं को इन योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को निर्देशित किया कि योजना से जुड़ी महिलाओं की वास्तविक आय का आकलन कर योजनाओं के प्रभाव का मूल्यांकन किया जाए तथा विकासखंड स्तर पर संचालित गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि योजनाओं के अपेक्षित परिणाम प्राप्त हो सकें।

उद्यान विभाग की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने किसानों को कीवी एवं अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों के संबंध में नियमित प्रशिक्षण देने, पॉलीहाउस आधारित खेती को बढ़ावा देने तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लाभार्थियों से नियमित फीडबैक प्राप्त कर योजनाओं की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया जाए और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।

जिलाधिकारी ने हिलांस आउटलेट के माध्यम से स्थानीय उत्पादों की घर-घर आपूर्ति व्यवस्था विकसित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों को अचार, जूस, चटनी, मशरूम, मसाले, फल संरक्षण उत्पाद तथा अन्य स्थानीय उत्पादों के उत्पादन एवं विपणन के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। साथ ही चारधाम यात्रा के दौरान एनआरएलएम समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सुझाव दिया कि स्थानीय संस्कृति, लोककला और पारंपरिक शिल्प पर आधारित स्मृति चिह्न एवं उपहार सामग्री तैयार कर यात्रियों के लिए उपलब्ध करायी जाए, जिससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार मिले और समूहों की आय में वृद्धि हो।

वीबी जी राम जी के कार्यों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सभी खंड विकास अधिकारियों को तीन दिनों के भीतर उपजिलाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपदा से प्रभावित ऐसे छोटे लेकिन आवश्यक कार्य, जो अभी तक किसी अन्य योजना अथवा मद से स्वीकृत नहीं हो पाए हैं, उन्हें चिन्हित कर प्राथमिकता के आधार पर मनरेगा में शामिल किया जाए। साथ ही ऐसे कार्यों की सूची तैयार कर उन पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रभावित क्षेत्रों को समयबद्ध राहत एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करायी जा सकें।

उन्होंने सभी खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक अधिकारी प्रतिमाह कम से कम 20 ग्राम पंचायतों का भ्रमण करें, जनसमस्याओं को सुनें, विकास कार्यों का निरीक्षण करें तथा उसकी सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भ्रमण के माध्यम से योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन होगा और समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा।

आंगनबाड़ी भवन निर्माण से जुड़े लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने भूमि चयन की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने ऐसे पांच विकासखंड चिन्हित करने को कहा जहां फल एवं सब्जी उत्पादन की पर्याप्त संभावनाएं हों तथा सड़क संपर्क बेहतर हो, ताकि वहां कोल्ड स्टोरेज स्थापित कर किसानों को फसल संरक्षण एवं बेहतर विपणन की सुविधा उपलब्ध करायी जा सके।

मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने कहा कि ग्रामीण विकास की योजनाओं का उद्देश्य केवल आधारभूत सुविधाओं का विस्तार नहीं, बल्कि ग्रामीणों की आय बढ़ाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, नवाचार, बेहतर समन्वय एवं नियमित निगरानी के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जाए तथा अधिक से अधिक लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।

बैठक में जिला विकास अधिकारी मनविंदर कौर, जिला पंचायत राज अधिकारी जितेंद्र कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल शर्मा, जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन भंडारी सहित समस्त खंड विकास अधिकारी उपस्थित रहे।

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