पिथौरागढ़: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से कैलास मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालुओं के लिए एक बेहद अच्छी और राहत भरी खबर सामने आई है। यात्रा के पहले आधिकारिक दल ने शुक्रवार सुबह सफलतापूर्वक तिब्बत (चीन) की सीमा में प्रवेश कर लिया है। इसके साथ ही, बीते 27 घंटों से पहाड़ी दरकने के कारण बंद पड़ा कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग भी कड़ी मशक्कत के बाद छोटे वाहनों की आवाजाही के लिए दोबारा खोल दिया गया है।
कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग पर मालपा से लमारी के बीच गुरुवार सुबह करीब 9:30 बजे एक विशाल चट्टान टूटकर सड़क पर आ गिरी थी, जिसके चलते पूरा मार्ग पूरी तरह ठप हो गया था। सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीमों ने तुरंत मोर्चा संभाला और मलबे को हटाने का काम युद्धस्तर पर शुरू किया। लगातार 27 घंटे के अथक प्रयास के बाद शुक्रवार दोपहर लगभग 12:30 बजे इस मार्ग को साफ किया जा सका। हालांकि, सुरक्षा के लिहाज से अभी इस मार्ग पर केवल छोटे वाहनों को ही आने-जाने की अनुमति दी गई है।
दूसरी ओर, कैलास मानसरोवर यात्रा का पहला जत्था अपनी मंजिल की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहा है। शुक्रवार सुबह ठीक नौ बजे इस दल के 52 सदस्यों ने लिपूदर्रा (लिपूपास) पार कर तिब्बत की सीमा में प्रवेश किया। इस पहले दल में देश के विभिन्न हिस्सों से आए 48 तीर्थयात्री, उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए एक चिकित्सा कर्मी (मेडिकल स्टाफ) और तीन कुक शामिल हैं।
इससे पहले, शुक्रवार सुबह सात बजे सभी यात्री नावीढांग से 9 किलोमीटर दूर कठिन चढ़ाई वाले लिपू पास के लिए रवाना हुए थे।


