Breaking News
गिलगिट-बाल्टिस्तान के स्कार्दू में विरोध-प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा, गोलीबारी में 38 लोगों की मौत
गिलगिट-बाल्टिस्तान के स्कार्दू में विरोध-प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा, गोलीबारी में 38 लोगों की मौत
चारधाम यात्रा 2026- हेली शटल सेवा के टेंडर अंतिम दौर में, जल्द शुरू होंगी सुविधाएँ
चारधाम यात्रा 2026- हेली शटल सेवा के टेंडर अंतिम दौर में, जल्द शुरू होंगी सुविधाएँ
किडनी स्टोन को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, समय पर इलाज जरूरी
किडनी स्टोन को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, समय पर इलाज जरूरी
जन औषधि केंद्र आज करोड़ों जरूरतमंद लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं- मुख्यमंत्री धामी
जन औषधि केंद्र आज करोड़ों जरूरतमंद लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं- मुख्यमंत्री धामी
‘चरक: फियर ऑफ फेथ’ की बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरुआत, फिल्म ने पहले दिन कमाए इतने रुपये
‘चरक: फियर ऑफ फेथ’ की बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरुआत, फिल्म ने पहले दिन कमाए इतने रुपये
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने नेपाल चुनाव में बालेंद्र शाह की प्रचंड जीत पर दी बधाई
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने नेपाल चुनाव में बालेंद्र शाह की प्रचंड जीत पर दी बधाई
नगर निगम का पहला फूड कोर्ट डेस्टिनेशन का निर्माण कार्य अंतिम चरण में, जल्द खुलेगा आम जनता के लिए
नगर निगम का पहला फूड कोर्ट डेस्टिनेशन का निर्माण कार्य अंतिम चरण में, जल्द खुलेगा आम जनता के लिए
सार्वजनिक संपत्ति और सौन्दर्यीकरण कार्यों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई- बंशीधर तिवारी
सार्वजनिक संपत्ति और सौन्दर्यीकरण कार्यों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई- बंशीधर तिवारी
देवभूमि के विकास की गूंज अब राष्ट्रीय मंच पर
देवभूमि के विकास की गूंज अब राष्ट्रीय मंच पर

अंतर्राष्ट्रीय चेरनोबिल आपदा स्मरण दिवस- एक ऐतिहासिक परमाणु दुर्घटना

अंतर्राष्ट्रीय चेरनोबिल आपदा स्मरण दिवस- एक ऐतिहासिक परमाणु दुर्घटना

नई दिल्ली। हर साल 26 अप्रैल को संपूर्ण विश्व में ‘अंतरराष्ट्रीय चेरनोबिल आपदा स्मिृति दिवस’ मनाया जाता है। इसे मनाने का उद्देश्य परमाणु ऊर्जा के खतरों और चेरनोबिल आपदा के परिणामों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। 26 अप्रैल‚ 1986 को पूर्व सोवियत संघ स्थित चेरनाबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र में एक रासायनिक धमाका हुआ था‚ जिससे खतरनाक रेडियोएक्टिव तत्व वातावरण में फैल गया था।
इस वजह से पूर्व सोवियत संघ के अनेक हिस्से विकिरण दूषण की चपेट में आ गए थे। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक चेरनॉबिल हादसे की गिनती इतिहास की सबसे गंभीर दुर्घटनाओं में होती है- जिसमें तीन देशों में लगभग 84 लाख लोग विकिरण की चपेट में आ गए थे।

26 अप्रैल की घटना
1977 में निर्मित, चेरनोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र का उपयोग तत्कालीन सोवियत संघ या आधुनिक पिपरियात, यूक्रेन में के लिए बिजली बनाने के लिए किया गया था। भयावह घटना से पहले, 1982 में चेरनोबिल संयंत्र में रिएक्टर 1 का आंशिक रूप से घटना हुई थी, जिससे कुछ नुकसान हुआ और मरम्मत में कुछ महीने लग गए। चेरनोबिल आपदा होने तक इस घटना की सूचना नहीं दी गई थी। 1986 में, परमाणु ऊर्जा संयंत्र में एक विस्फोट ने बेलारूस, यूक्रेन और रूसी संघ के बड़े क्षेत्रों में रेडियोधर्मी फैला दिया। आपदा की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तीन यूरोपीय देशों में करीब 84 लाख लोग विकिरण के संपर्क में आए थे।

इतिहास
संयुक्त राष्ट्र ने 26 अप्रैल 2016 को इस दिन को घोषित किया था, जो 1986 की परमाणु आपदा की 30 वीं वर्षगांठ थी।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top