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नारी निकेतन की बदली तस्वीर- एक छत के नीचे सुकून, भरोसा और नई ज़िंदगी

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दर्द से विश्वास तक का सफ़र- नारी निकेतन में संवरती ज़िंदगियाँ

देहरादून नारी निकेतन में 178 महिलाओं और 44 बच्चों को मिल रहा सुरक्षित व सम्मानजनक जीवन

देहरादून। देहरादून के केदारपुरम क्षेत्र में स्थित राजकीय नारी निकेतन, बालिका निकेतन, बाल गृह एवं शिशु सदन आज सिर्फ एक सरकारी परिसर नहीं, बल्कि बेसहारा महिलाओं और अनाथ बच्चों के लिए सुरक्षा, सम्मान और नई शुरुआत का सशक्त केंद्र बनकर उभर रहा है। बाहर से साधारण दिखने वाला यह परिसर भीतर से संवेदनशील प्रशासन और मानवीय प्रयासों की जीवंत मिसाल पेश करता है।

मुख्यमंत्री की प्रेरणा और जिला प्रशासन के संकल्प से इन संस्थानों को ऐसा सुरक्षित आश्रय बनाया गया है, जहां परित्यक्त और शोषित महिलाएं तथा बच्चे न केवल छत पाते हैं, बल्कि आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर भी प्राप्त कर रहे हैं। यहां रहने वालों के लिए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, संतुलित पोषण, स्वच्छ वातावरण और स्नेहपूर्ण देखभाल सुनिश्चित की जा रही है, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक घावों पर मरहम लग सके।

जिलाधिकारी सविन बंसल के सतत प्रयासों से बुजुर्ग महिलाओं के लिए 30 बेड का अतिरिक्त भवन लगभग तैयार हो चुका है। यह भवन जीवन के अंतिम पड़ाव पर अकेली रह गई महिलाओं के लिए सम्मान और सुकून का ठिकाना बनेगा। प्रशासन द्वारा निकेतन की व्यवस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि किसी भी महिला या बच्चे को असुरक्षा या उपेक्षा का अनुभव न हो।

जिला योजना एवं खनिज न्यास मद से बजट की व्यवस्था कर परिसर के आधारभूत ढांचे को मजबूत किया गया है। सीवर लाइन, डोरमेट्री, आवास, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विस्तार किया गया है। वर्तमान में नारी निकेतन में 178 बेसहारा, परित्यक्त एवं शोषित महिलाएं रह रही हैं, जबकि बालिका निकेतन में 21 बालिकाएं और बाल गृह एवं शिशु सदन में 23 बच्चे निवासरत हैं। इन सभी को शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष देखभाल प्रदान की जा रही है।

बालक एवं बालिका निकेतन में बच्चों को औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ कंप्यूटर शिक्षा भी दी जा रही है। वहीं नारी निकेतन की महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई-बुनाई, ऊनी वस्त्र निर्माण और क्राफ्ट डिजाइन जैसे आजीविकापरक प्रशिक्षण प्रदान किए जा रहे हैं। संगीत, योग और वाद्य यंत्र प्रशिक्षण के माध्यम से उनके मानसिक और शारीरिक सशक्तिकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

बालिका निकेतन में बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए खेल मैदान का निर्माण कराया जा रहा है, जहां खो-खो, कबड्डी, बैडमिंटन और योग जैसी गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को और मजबूत करने के लिए दो अतिरिक्त होमगार्ड, दो नर्सों की तैनाती तथा डॉक्टरों की नियमित विजिट सुनिश्चित की गई है।

परिसर में शौचालय-स्नानागार, डायनिंग एरिया, मंदिर परिसर की ग्रिलिंग, जिम, लॉन्ड्री रूम, रसोई, छत मरम्मत, इन्वर्टर स्थापना सहित कई विकास कार्य पूरे किए गए हैं। बच्चों के लिए पर्याप्त रजाइयों, बेड और गद्दों की भी व्यवस्था की गई है, जिससे उन्हें सुरक्षित और आरामदायक वातावरण मिल सके।

गत दिसंबर में किए गए निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी सविन बंसल ने इन संस्थानों की सभी आवश्यकताओं को प्राथमिकता से पूरा करने का आश्वासन दिया था, जिसका असर अब धरातल पर साफ नजर आने लगा है। प्रशासन की संवेदनशीलता के चलते योजनाएं कागजों से निकलकर जिंदगियों को संवार रही हैं। केदारपुरम का यह निकेतन आज उम्मीद, पुनर्वास और इंसानियत की सशक्त कहानी बन चुका है।

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